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मेरी गरम सालियां
09-07-2014, 02:09 AM
Post: #6
उस लड़की को बहुत मजा आएगा जो तुमसे चुदवायेगी ," कंचन मनोज से चुदवाती हुयी बोली .मनोज कस -कस कर धक्के मरते हुए बोला , "हाँ जाने -बहार , तुम्हारी चूत भी एकदम लाज़वाब है .एकदम तिघ्त, उभरी हुयी..कितनी गरम और नरम है..हाय.और इसकी गुलाबी रंगत... लगता है इसे चोद्ता ही जाऊं ."नीचे से कंचन सिस्कारी मरते हुए बोली , "ओह्ह ! मेरे राजा और पेलो और पेलो अपनी रानी की चूत मे अपना मोटा लंड . आह ! ..मेरी चूत तुम्हारा लंड खा कर और अपनी सील तुड़वा कर निहाल हो रही है . हाय ! लंबे और मोटे लंड की चुदाई ही कुछ और ही होती है . बस मज़ा आ गया . हाँ हाँ , तुम ऐसे ही अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरी चूत मे अपने लंड से धक्का मारते रहो . मेरी चूत को भी बहुत दिनों से शौक था मोटे और लंबे लंड से सील तुड्वाने का.और फ़िर उससे चुदवाने का.जम कर.. उसको और जोर जोर से खिलाओ अपना मोटा और लंबा लंड ."लेकिन जल्दी ही खत्म हो गई उनकी चुदाई . दोनों का पानी आधे मिनट के फरक पर निकल गया . कंचन ऐसी चुदाई प कर मस्त हो गई . रात की चोदाई से ज्यादा कड़क चोदाई उसे सुबह वाली लगी .हॉस्पिटल जाकर मीना को देखने और रीना को फ्री करने के कारण मनोज को बिस्तर पर से जल्दी उठना पड़ा . बाथरूम मे जाने के बाद पता चला की बाथटब का शावर और नल दोनों ख़राब हो गए है . पानी नही आ रहा था . तो मनोज यह कहकर निकल गया की मैं प्लंबर को भेज रहा हूँ . अगर जल्दी आ गया तो ठीक है नही तो रीना को बता देना की प्लंबर से नल ठीक करवाना है . मनोज हॉस्पिटल जाकर रीना को फ्री किया और बोला की घर पहुंचकर कंचन को जल्दी भेज देना ताकी वोह ख़ुद ऑफिस जा सके .रीना घर पहुँची तो कंचन बाथरूम से निकल कर अपने कपडे बदल रही थी . बाथरूम मे स्टोरेज किए हुए पानी से उसने अपना काम चला लिया था . कंचन के चहरे पर छायी हुयी खुशी को देखकर रीना समझ गई की रात भर क्या क्या हुआ होगा उसने सोच लिया की कंचन की सील कल रात मे खुल गई है..क्युकी बेड रूम की चादर पर खून उसे दिख गया था... फिर भी अनजान बनते हुए उसने कंचन को छेड़ते हुए पूछा , "है मेरी जान , बड़ी खुश दिख रही हो . रात भर सोयी नही थी क्या ? लगता है जीजा जी ने बहुत परेशान किया है .""नही तो . ऐसी तो कोई बात नही है .""अच्छा हमसे ही नाटक .""जब कुछ हुआ ही नही तो क्या नाटक करूं ."फ़िर रीना ने उसे बेडरूम की चादर पर खून दिखाया और बिस्तर के नीचे पड़ी हुयी फटी हुई नाईटी की ओर इशारा किया. तो कंचन शरमा गई और फिर धीरे धीरे सारी बात रात की उगल दी कंचन ने .रीना ने कहा जीजू का लैंड बहुत मज़बूत और मोटा है ये तो मैं जानती हु..मैंही कल उनसे चुदवाने के मूड मे थी..लेकिन तेरी लॉटरी लग गई. बहुत मज़ा आया होगा ना?..और दोनों फ़िर रस ले कर बातें करने लगी . रीना और कंचन रात की बात करते करते दोनों ही उत्तेजित हो गए . आपस मे अनजाने ही एक दूसरे के बदन को सहलाने लगी . दोनों की चूतें अन्दर की गरमी से पिघलने लगी . तभी टेलीफोन की घंटी बजी . कंचन ने फ़ोन उठाया ."मैं मनोज बोल रहा हूँ .""बोलो जीजा जी , मैं कंचन बोल रही हूँ .""देखो प्लंबर को बोल दिया है . थोड़ी देर मैं आ जाएगा . लेकिन तुम जल्दी आ जाओ . मुझे कुछ दवाई लाना है फिर मैं ऑफिस निकल जाऊंगा ."कंचन जल्दी ही हॉस्पिटल के लिए निकल गई साथ मे कह कर गई की बाथरूम का नल ख़राब है , प्लंबर आएगा . रीना मन मसोस कर रह गई . रात मे भी मौका नही मिला और अब सुबह थोड़ी बहुत गरमी शांत होती वह भी नही हुयी .उसे मनोज पर ग़ुस्सा आ रहा था..ऐसे तो मेरी चुन्ची दबाते है...गांड दबाते है..आज छुट्टी ले कर घर रुक जाते तो मै भी उस मोटे और लंबे लंड से एक बार तो चुदवा लेती.. आख़िर चूत तड़पती ही रह गई . वोह उसे शांत करने के लिए जीजी की एक नाईटी पहन कर बाथरूम मे चली गई . उससे बदन तो ढक गया लेकिन गला काफी खुला हुआ था और नीचे से भी घुटने के ऊपर तक ही थी .नाईटी को उतार कर जैसे ही नल खोला तो ध्यान आया की वोह तो ख़राब है . उसी हालत मे बैठी बैठी अपनी चूत को हाथ से सहलाने लगी . चूत को सहलाते -सहलाते उसे ध्यान ही नही पड़ा की दरवाजे की बेल कितनी देर से बज रही है . फटा - फट नाईटी पहन कर बाहर निकली और गेट खोल दिया . सामने खड़ा था प्लंबरएक मजबूत किस्म का इंसान . रंग सांवला लेकिन कद काठी कसरती . वोह भी अपने सामने खड़ी रीना को देखता ही रह गया . उफ़ क्या नशीला बदन है . एक मिनी नाईटी पहने हुए तो क़यामत ढा रही थी . छातियां नाईटी मे समां नही रही थी . आधे मम्मे बाहर छलक रहे थे . गहरी साँस लेते हुए बोला , "मनोज साहेब ने बुलाया है . क्या कोई नल ख़राब है .""हाँ .. हाँ . बाथरूम का शावर और नल दोनों ख़राब है . पानी नही आ रहा है ."संजय , यही नाम था प्लंबर का , सीधे बाथरूम मे चला गया . बाथ टब का शोवेर और नल चालू कर के देखा लेकिन पानी नही आ रहा था . तो उसने शावर को निकाल दिया और फिर बाथरूम के अन्दर बनी हुयी टंकी जो सीलिंग से लगी हुयी थी , से नल को चेक करने लगा ."लगता है की टंकी से पानी नही आ रहा है . ऊपर चेक करना पड़ेगा . कोई टेबल है क्या ?"रीना ने एक मध्यम साइज़ की टेबल ला कर दी . वोह उस पर चढ़ कर टंकी चेक करने लगा और बोला , "पानी तो पुरा भरा पड़ा है . पाइप और फिटिंग चेक करना पड़ेगा ."यह कह कर अपनी पैंट और शर्ट निकलने लगा . एक बनियान और स्वीमिंग कास्ट्युम जैसा अंडमनोज यर पहने हुआ टेबल पर चढ़ गया . रीना उसके गठीले बदन को देखी तो देखते ही रह गई . मजदूर आदमी का जिस्म था . एक दम कड़क .ऊपर से पाइप को खोलते हुआ बोला "मेम साहेब , आप जरा बाथ टब के पास रहना . जब पानी आए तो शावर को पाइप के ऊपर पकड़ कर रखना ."बाथरूम मे जगह कम थी . टेबल ने जगह घेर कर रखी थी . रीना बाथ टब मे जाकर खड़ी हो गई . जब पानी आने लगा तो वोह शावर को पाइप के ऊपर लगाने लगी लेकिन बाथ टब मे खड़ी होने की वजह से रीना पुरी तरह से भीग गई . उसका बदन नाईटी से झलकने लगा . उसके कबूतर नाईटी से आधे तो पहले ही दिख रहे थे अब बाकी आधे नाईटी के पारदर्शी (transparent) हो जाने की वजह से दीखने लगे . उसके दर्क निपल एक दम से तन कर आमंत्रण दे रहे थे . जांघों से नाईटी चिपक गई थी . उसके उभरे हुए नितम्ब आकर्षित कर रहे थे . संजय ने जब नजर नीचे कर यह नज़ारा देखा तो उसका लंड दन -दन करता हुआ खड़ा हो गया . उसका लंड एक गोरी और मस्त लौंडिया को देख कर फड़फडाने लगा . वोह पाइप वापस फिटिंग करते हुए कभी पाइप को देख रहा था तो कभी रीना की उफनती हुयी जवानी को देख रहा था . तभी उसके हाथ से रेंच -पाना (an instrument to tight pipe) नीचे बाथ टब मे गिर गया और उसके हाथ से पाइप भी छूट गया .पानी ऊपर पाइप से नीचे गिरने लगा . ख़ुद भी पुरी तरह से भीग गया . उसके बदन के कपडे भी भीग गए . कोस्ट्युम जैसे अंडमनोज यर से लंड का साइज़ साफ दिख रहा था .बहुत ही मोटा और लंबा लग रहा था.और मुड़ा हुआ था.. ऊपर से ही कहा , "मेम साहेब , जरा वोह रेंच -पाना देना प्लीज़ ."रीना ने रेंच -पाना उठाया तो शावर अपनी जगह से खिसक गया . जिसकी वजह से पानी फिर गिरने लगा . एक हाथ से शावर को पकडे हुए दूसरे हाथ से झुक कर उस ने रेंच -पाना को उठाया और उसकी मस्तानी गांड ..ऊह्ह..ओह्ह ..क्या दृश्य था ..मोटे गदराये नितम्बो की गोलाई और उसमे वो गांड..वो हाथ से रेंच पाना देने लगी . लेकिन पानी गिरते रहने की वजह से उसका ध्यान शावर की तरफ़ ही था . दूसरा हाथ रेंच -पाना संजय को देने के लिए आगे बढाया हुआ था . ऊपर संजय भी पाइप से पानी गिरते रहने की वजह से पाइप की और ही देख रहा था . उसने ऊपर ही मुह किए हुए वापस कहा , "मेम साहेब , प्लीज़ . वह रेंच -पाना देना ."रीना भी शावर की और देखते देखते बोली , "दिया तो है . लेलो ."तभी दोनों की नज़र आपस मे टकराई तो देखा की रेंच -पाना रीना ने अनजान -वश संजय के मोटे फूले हुए लंड मे फंसा दिया था .संजय यह देखकर मुस्कुराया और रीना ने अपनी नज़र नीचे झुका ली . संजय रेंच -पाना अपने लंड पर से निकाल कर पाइप को फिटिंग करने लग गया .संजय बोला , "अच्छा मेम साहिब , अब धक्का नही दूँगा . मैं थोड़ा ज्यादा ही जोश मे आ गया था . लेकिन अब इसे चूसो . तड़पाओ मत मुझे ."रीना उसके लंड को चाट रही थी ऊपर से फव्वारे से पनि गिर रहा था . संजय को जन्नत का मजा मिल रहा था . तभी संजय को महसूस हुवा की अगर लंड को रीना के मुह से नही निकला तो फव्वारे की तरह उसका लंड भी पानी फेंकने लगेगा . उसने रीना को बाथ टब मे लेटकर उस पर छा गया और उसके मम्मे अपने हाथों से पकड़ एक को मुह मे लेकर आम की तरह चूसने लगा . रीना के मुह से सिस्कारी निकल गई ..आह्ह..उफ्फ्फ..इश..श.स्.स्.स्.स्. धीरे..लेकिन अब संजय कुछ नही सुनने वाला था . संजू बगैर दांतों से नुकसान पहुँचाये उसके एक -एक करके दोनों उरोजो को बारी -बारी से मुह मे लेकर चूस रहा था . साथ मे बोलता भी जा रहा था , "मेम साहेब , तुम्हारे चुचियो का जवाब नहीं .....तुम्हारे चूंची कितने मलाई जितने चिकने है .....और तुम्हारे गुलाबी निपल .. उफ़ ....इन्हे तो मैं खा जाऊंगा ."रीना सिस्कारी लेते हुए बोली , ""हाय ! और जोर से मेरी चूची मसलों , इनको ख़ूब दबाव , दबा दबाके इनका सारा रस पी जाओ . मुझे बहुत मज़ा आ रहा है . मेरे पुरे बदन मे नशा छा रहा है . हाय मुझको इतना मज़ा कभी नही मिला . और दबाव मेरी चूची को ."संजय उसके मम्मे चूसते हुए अपने एक हाथ को उसके मम्मे से सरकाते हुए उसकी चूत के ऊपर हाथ से मालिश करने लगा . रीना का जोश दुगुना हो गया . उसकी सिस्कारियां बढती ही जा रही थी . जिनको सुनकर संजय का भी जोश बढ़ गया . उसका मुह और दोनों हाथ की स्पीड डबल हो गई . अपनी जीभ से उसकी कड़क हुयी निपल को चूसने के साथ उसकी चूत और झांटो पर अपनी रगड़ बढ़ा दी . "आः आह्ह ......प्लीज़ आहिस्ता करो . रगडो मेरी चूत को .. आराम से करो .. मजा आ रहा है तुम ने क्या कर दिया है .. आज ऐसा पहली बार फील कर रही हूँ और बहुत अच्छा लग रहा है .. हाँ ऐसे .. आराम से .. मगर रुकना मत .. करते रहो .. ओह्ह हह स्.स्.स्.स्.स्.स्.उफ्फ्फ....और उसने टटोल कर फ़िर से उसके लंड को पकड़ा जो की फुफकार रहा था... "लोहे को गरम होते देख संजय ने अब अपना हथोडा मारना ही अच्छा समझा . उसने रीना को दीवाल के सहारे उठा के खड़ा कर उसके पीछे से अपने दोनों हाथो से उसके चूतड को सहलाना शुरू कर दिया . उफ़ ... क्या गुदाज़ जिस्म के उसके चूतड थे . दूध मे सिन्दूरी कलर डाले हुए रंग के चूतड . वोह अपनी किस्मत पर यकीन ही नही कर पा रहा था . वाकई मे ऐसी चूत और चूतड किस्मत वाले को ही मिलते है . उसने अपनी जीभ निकल कर उसके चूतड को चाटना चालू कर दिया . रीना के मादक बदन मे एक सिहरन दौड़ गई . उसका बदन का एक -एक रोंया सिहर उठा . पुरे बदन मे बिजली कड़क रही थी . चूतड को चाट -ते चाट -ते अपनी जीभ को उसकी पीछे से उभर कर बाहर आई हुयी चूत पर लगा दिया . जीभ चूत पर लगते ही रीना के मुह से "ऑफ़ फ . ..ओफ्फ्फ " की आवाज आनी शुरू हो गई . अपनी जीभ को संजय ने धीरे धीरे आगे बढ़ाते हुए चूत की चुदाई अपनी जीभ से चालू कर दी . चोदना -चाटना , चोदना -चाटना , चोदना -चाटना यही कर रहा था अपनी जीभ से उसकी गुलाबी चूत को दोनों फांक चिपकी हुयी थी..उसे ऊँगली से थोड़ा फैला लिया था..."ओओओह मा .. ओह आहा आया .. यह क्या कर रहे हो , बहुत मज़ा आ रहा है और चाटो , चूस डालो ... पानी निकल दो इसका .... बहुत प्यासी है मेरी चूत ," रीना की लहराती हुयी आवाज बाथरूम मे गूँज रही थी . मेरी प्यास बुझा दो , मुझे ठंडा कर्दो .. मेरा जिस्म बहुत जल रहा है .. कुछ कुछ हो रहा है मन मे , प्लीज़ मेरी आग बुझा दो मेरी .. प्लीज़संजय ने उसकी रसीली छूट की चुसाई कर उसे वैसे ही खड़ा रहने दिया और अपने सख्त लंड को उसके चूतड पर दबाना शुरू कर दिया . लंड को एकदम नजदीक देख उसकी चूत का पानी बहना चालू हो गया . चूत एकदम से जूसी हो गई . अपने हाथ को पीछे ले कर संजय को अपने बदन से चिपका लिया . उसकी चूत की भूख अब बढती ही जा रही थी . अब उससे सहन नही हो पा रहा था . वोह भड़क कर बोली , "उफ्फ्फ ... देख क्या रहे हो ... चालू करो .... लगाओ अपने लंड को निशाने पर और मारो धक्का ."संजय ने अपने लंड को उसकी चूत के निशाने पर ला थोड़ा सा धक्का दिया . आधा सुपाडा लंड का चूत मे जा कर फँस गया . दूसरा धक्का मारा तो उसके लंड का पूरा सुपाडा उसकी चूत मे जा कर धंस गया . तीसरा धक्का मारा तो आधा लंडउसकी गुफा मे गायब हो गया . साथ ही रीना की चीख पूरे घर मे फ़ैल गई..ऊह मेरी माँ..मर

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09-07-2014, 02:09 AM
Post: #7
गयी..निकालो....अह्ह्ह..आह्ह..बाप रे..इतना मोटा...निकालो..मैं मर जाऊंगी.. लेकिन संजय रुका नही..वो समझ गया था की ये चुदी हुयी चूत है ..थोड़ा चिल्लायेगी..क्युकी इतना मोटा लंड कभी चूत मे नही घुसा है ..उसके शहरी दोस्त का नए ज़माने का लंड ही घुसा होगा..उसने रीना को थोड़ा दबा के पकड़ा और फ़िर धीरे धीरे चोदने लगा..एक और धक्का मारा तो इस बार रीना की आनंद भरी चीख भी निकल गई . "हाय .... क्या लंड है तुम्हारा .... एक दम से तगड़ा और सख्त .... उफ़ ..... वाकई मे ही ... जैसे कोई गरम गरम हथोडा जाकर मेरी चूत मे फँस गया हो ."अब संजय ने अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए . खड़े होने की वजह से पूरा लंड तो अन्दर नही जा रहा था लेकिन जितना भी जा रहा था वह रीना की चूत मे खलबली जरूर मचा रहा था . थोड़ी देर इस तरह दक्के मरने के बाद उसने अपने लंड को बाहर निकाल दिया और रीना को बाथरूम के फर्श पर लेटा कर अपने लंड को उसके मुह मे दाल दिया . रीना ने गप्प से उसको मुह मे ले लिया . थोड़ी देर चूसाने के बाद बाहर निकाल उसके लंड को हाथ से पकड़ सुरेश को कहा , "प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत मैं डाल दो . मुझे और मत तड़पाओ ज़ालिम . मुझे छोड़ो , मैं तुम्हारे लंड की दीवानी बन गयी हूँ . अपने लंड से मेरी चूत की प्यास बुझाओ ."संजय ने उसकी जांघों को चौड़ा कर अपने लंड को उसकी चूत पर टिका दिया . फिर कस कर एक धक्का मारा .लंडउसकी रस से भरी हुयी उसकी चूत को ककड़ी की तरह फाड़ता हुआ चूत की अन्दर वाली दीवार से सीधा जा टकराया . रीना तो एक बार पुरी तरह कंप गई और पूरा बदन दहल उठा और मुह से चीख निकल गई..उईई माँ.मार डाला ..मेरी फट गयीई...आह्ह्ह..लेकिन संजय को अब कोई परवाह नही थी..उसने आव देखा ना ताव..और फटके लगाने शुरू कर दिए..उसने देखा उसके लंड पर कुछ खून के दाग लगे है..आज सच मे रीना की चूत फट गई..संजय ने . लंड को बाहर निकाल वापस धक्का मारा तो उसकी सिस्कारी निकालनी चालू हो गई . "उफ़ ... अह्ह्ह ..." संजय अपनी फुल्ल स्पीड से उसकी चूत के अन्दर बाहर अपने लंड को कर रहा था .रीना बड़बड़ा रही थी , "ओह्ह ह ... क्या चोद रहे हो तुम .... वाकई मे मेरी चूत धन्य हो रही है ... तुम्हारी चुदाई से .... उफ्फ्फ .... मेरी चूत को आज चोद -चोद कर ख़ूब रगड़ाई करो .... आह्ह्ह ह .... चोदो .... चोदो .... और चोदो .... चोदते ही जाओ .मुझे मार डालो..मेरी चूत का पूरा पानी निकालो "हाँ रानी .... ख़ूब चोदुंगा तुझे आज ...तुम्हारी जीं भर की कसर निकालूँगा आज मैं ....लो संभालो मेरे लन्ड को .....उफ्फ्फ ....तुम्हारी चूत .....क्या नरम और नाजुक है ....तुम्हारे संतरों का भी जवाब नही ....उफ़ क्या चुचिया है तुम्हारी ....आज तुझे ऐसा चोदुन्गा मैं की जिंदगी भर याद रखोगी ."धक्कों की स्पीड बढती ही जा रही थी . दोनों मदहोश हुए चुदाई मे लगे हुए थे रीना इस बीच दो बार झाड़ चुकी थी..और चूत ने इतना पानी फेंका था की लंड अन्दर अब आराम से फिसलता हुआ जा रहा था और बाहर भी आ रहा था..और बाथ रूम मे . घचा -घच ....फचा -फच .की आवाज़ आने लगी थी. दोनों आँखों से एक -दूसरे को देखते हुए एक दूसरे मे ज्यादा से ज्यादा सामने की कोशिश मे लगे हुए थे लंड अन्दर जता फिर बाहर आकर दुगने जोश से वापस अन्दर चला जाता . चूत उसका थोड़ा ऊपर उठके स्वागत करती फिर गुप्प से उसको अपने अन्दर समां लेती .रीना की चीखें बढती गई , "राजा चोदो मुझे . और तेज .. और जोरसे ... चोदो . ऊफ्फ्फ , ओह्ह्ह , आह्ह्ह , ऊईई माँ , मार गई मैं आज . फाड़ दो मेरी चूत को .... और जोर से चोदो मुझे ...अपने लंड से फाड़ दो मेरी चूत को ... मुझको अपना बनालो .... चोदो मुझको ... जोर से चोदो ... प्लीज़ .....इसको अन्दर तक चोदते रहो .... ऊईए ... उफ़ ... कितना मोटा लंड है , ऐसा लगता है की गधे का लंड हो ....मुझे ऐसा लग रहा है की मैं पहली बार चूदी हूँ ....तुम बहुत मजे का चोदते हो देखो मेरी चूत फटी क्या..और उसने ख़ुद अपना एक हाथ चूत और लंड पर लगाया..और देखा की खून निकला है..वो बोल उठी..राजा..आज सच मे मेरी सील टूटी है..साली कंचन ने कल सील तुडवाई लेकिन..मेरी चुदी हुयी चूत की भी आज फ़िर से सील टूट गई..ई.ई.ई.आह्ह..."संजय अपने लंड को थोड़ा निकाल उसकी जांघों को और फैला कर उसकी चूत की चुदाई चालू कर दी . अन्दर तक जा रहे लंड से अब उसकी चूत पिघलने को तैयार हो गई . रीना ने अपनी टांगो से उसकी टांगो को एकदम से जकड लिया और बड़ बड़ाई , येस्स ... मेरे राजा ... चोदो मुझे .... उफ्फ्फ .... और .... और ..... अह्ह्ह . ... मेरा पानी .... हाय .....मेरा पानी निकलने वाला है ....राजा ....चोदो ..आह आह आह्हा आह ओफ्फ्फ ..मेरा पानी निकला .....हाँ .... निकला ..... हाँ .हाँ हाँ हाँ उफ़ इश श स्.स् स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्. .... निकल गया ."संजय के साथ एक -दम से चिपट कर अपनी चूत के पानी से उसके लंड को सींच ही रही थी ..इस बार उसका पानी बहुत तेजी से और बहुत सारा निकला..और उसके इस तरह चिपकाने से संजय के लंड ने भी अपना फव्वारा छोड़ दिया . चूत और लंड का मिलन अपने चरम पर पहुँच गया . दोनों एक दूसरे की बाँहों मे खोते हुए निढाल हो कर फर्श पर ही लेट गए . थोड़ी देर बाद संजय उठा और अपनी नज़रे रीना की आँखों मे गडाते हुए बोला , "मेम साहिब ये चुदाई मुझे जिंदगी भर याद रहेगी ."रीना ने भी कहा ,"और नही चोदोगे मुझे .""नही मेम साहिब , अब दूकान पर जन होगा . नही तो सेठ को बोलना भारी पड़ेगा मुझे ."इच्छा नही होते हुए भी संजय को विदा करने रीना उठ खड़ी हुयी .उसकी चूत की हालत ख़राब हो गई थी..ऐसी चुदाई उसने सपने मे भी नही सोची थी..पुरा बदन टूट रहा था..लेकिन फ़िर भी अच्छा लग रहा था...संजय खड़ा होकर अपने कपड़े पहने और रीना को चूमता हुवा बाथरूम से बाहर निकल गया .दरवाजे पर आया रीना उसके पीछे थी उसने देखा फिर बगैर कपड़ों मे खड़ी रीना को अपनी बाँहों मे समेत -ते हुए उसके होंठों को चूमा , चुचियो को सहलाया , चूत को मसला . रीना भी उसकी बाँहों से अपने एक हाथ को फ्री कर पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को मसलने लगी . लंड झट से खड़ा हो गया . खड़े हुए लंड ने रीना के हाथों मे फुर्ती ला दी . और जोर से मसलने लगी और बोली , "देखो इसे . इसको अभी नही जाना है ."फिर नीचे बैठ कर उसके लंड को पैंट की चैन खोल कर बाहर निकाल ली और चूसाने लग गई . लंड मुह मे जाते ही उछल कूद मचने लग . अपनी पैंट को नीचे खिसका कर रीना को घोड़ी बना कर अपना लंड उसकी नाजुक चूत मे एक धक्के मे पेल दिया और क़रीब २० मिनिट ऐसे ही चोदा और फ़िर अपना पूरा माल उसकी चूत मे डाला..ये चुदाई बहुत ही घमासान थी..रीना सिर्फ़ चीखती रही..आह्ह..मर..गयी.ई.ई..अआछ..चोदो..और संजय ने हुमच हुमच कर चोदा जब रीना झड़ी उसके १ मिनिट बाद ही संजय ने अपना पानी भी उसकी चूत मे डाल दिया... रीना की जान मे जान आई . उसकी चूत लंड खाने को ही उतावली थी और उसे लंड मिल गया ..प्यारी चूत वालियों...कैसी लगी ये चुदाई..
दोस्तो अभी तक आपने पढ़ा की कैसे कंचन की कुंवारी चूत की चुदायी मनोज ने की और रीना की गरम तड़पती चूत मे प्लंबर संजय ने अपना लावा डाल के उसकी आग को ठंडा किया

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09-07-2014, 02:10 AM
Post: #8

कंचन की पिछली रात अपने जीजा जी के साथ और आज सुबह ही रीना की प्लंबर के साथ चुदाई हो चुकी थी लेकिन चूत का मज़ा देखो अभी बात करते -करते दोनों की चूत मे फिर से खाज शुरू हो चुकी थी . रीना ने संजय के लौडे का पूरा साइज़ अपनी बातों से कंचन को बताया . सुनते ही कंचन के मुह से सिस्कारियां निकालनी चालू हो गई . अपने हाथ से वोह रीना के बूब्स को हलके हलके सहला रही थी . रीना के दिल और दीमाग पर संजय द्वारा की गई चुदाई छायी हुयी थी . उसे अपने बूब्स पर कंचन का हाथ फेरना अच्छा लग रहा था .लेटे लेटे रीना ने अपनी आँखों को बंद कर लिया और इस आनंद का ख़ूब मज़ा ले रही थी .कंचन की चेष्टाये बढ़ने लगी . उसने रीना की अस्त -व्यस्त हुयी नाईटी को निकाल फेंका . अपनी जीभ को उसके मम्मो के पास लेजा कर उसे चाटने लगी . उसकी जीभ नीचे से ऊपर उसके संगमरमरी कबूतरों को हलके हलके चाट रही थी . भारी बूब्स को चाटने मे कंचन को भी ख़ूब मज़ा आ रहा था . "उफ्फ्फ , चाट ... रगड़ रगड़ कर चाट ," ऐसा कह कर रीना ने अपने हाथ बढ़ाकर उसकी जांघों पर फेरना चालू कर दिया . जांघों पर हाथ फेरते ही कंचन को गुदगुदी का एह्साश हुआ . उसके बदन मे करंट दौड़ाने लगा . अपनी दोनों जांघों को उसने फैला दिया अन्दर उसने पैंटी नही पहना था..असल मे दोपहर के ३ बजे कंचन हॉस्पिटल से घर आ गई थी..और उसने आते ही रीना की हालत देखी..उसे पहले लगा की शायद मनोज दोपहर मे घर आया होगा और उसने रीना की कस के चुदाई की है..रीना को चलने मे भी तकलीफ हो रही थी..संजय के मोटे लंड ने उसकी हालत ख़राब कर दी थी...लेकिन बाद मे रीना ने ख़ुद ही सब उसे बता दिया..सुनकर ही कंचन गरम हो गई थी और उसने अन्दर कुछ भी नही पहना था...जगह मिलते ही रीना के हाथ कंचन की जांघों के और अन्दर घुसने लगे . उसके हाथ किसी खास जगह को तलाश रहे थे . थोड़ा गीलापन उसके हाथ को मह्सूश हुआ . उसे अपनी मंज़िल मिल गई . अपनी अन्गूलियों से कंचन की चूत को सहलाने लगी . चूत पर अन्गूलियों के छूते ही कंचन की जीभ की स्पीड रीना के बूब्स को चाटने के लिए और बढ़ गई . कंचन के दांतों की हलकी -हलकी चुभन भी रीना को महसूस हो रही थी वैसे रीना की चुंचिया एकदम लाल हो गई थी और निपल भी सुज़े हुए लग रहे थे..दर्द तो था..संजय ने इन्हे बहुत मसला था..जैसे कपड़ा निचोडा हो..और निपल चूसने मे तो उसने कोई कसर नही छोड़ी थी.. लेकिन यह चुभन पीड़ा देने की बजाय ज्यादा आनंद दे रही थी . रीना ने अपनी एक अंगुली कंचन की रस से भीगी हुयी चूत के अन्दर पेल दी . अपनी अंगुली को वोह लंड की जगह उपयोग मे ला रही थी .दोनों के मुह से सिस्कारियां निकल रही थी . अब दोनों एक दूसरे को अपनी बाँहों मे लेकर अपने गरम जिस्म को आपस मे रगड़ना शुरू कर दिया . दोनों के बदन की रगड़न से पूरे कमरे का माहौल नशीला हो गया कमरे मे आह्ह..ओह्ह..इश स्.स्.स्.स्.स्. हाय..की आवाज़ आ रही थी. .. दोनों को अब एक -एक लंड की जरूरत महसूस हो रही थी लेकिन मजबूरी मे दोनों और क्या कर सकती थी . दोनों एक दूसरे से चिपट कर एक दूसरे के मम्मे को , चूत को सहला रही थी दबा रही थी... फिर थोड़ी ही देर मे दोनों हापने लगी और निढाल हो कर बिस्तर पर लेट गई .लेकिन ऐसे पड़े पड़े दोनों ही अपनी चूत की आग को और भड़कती हुयी देख सिस्कारियां ले ले कर अपनी ही उन्गलिओं से चूत को चोदना चालू कर दिया . फिर आपस मे ही घूम कर एक दूसरे की चूत को चूसने लगी . जीभ लगते ही दोनों की सिस्कारियां और बढ़ गई . जहाँ रीना सिस्कारी मरते हुए चीख रही थी , "अहह ...उफ़ ....देख कैसी चूत ....मे आग लगी .साले प्लाम्बेर को फ़िर से बुला ले...नही तो जीजा जी को फ़ोन कर जल्दी आने के लिए.....हाय ....तू मेरी चूत को .देख क्या हालत की है......उफ्फ्फ ...और चाट ....एस ....चाट -ती जा ."वही कंचन कह रही थी..जीजा जी जब चोदेगा तब मज़ा बहुत आएगा..बहुत प्यार से गरम करता है..तू..जीभ लगा..हाय..और..अन्दर...आह्ह..उफ़..ऐसे ही दोनों बड़बड़ा रही थी कंचन सिस्कारी मरते हुए मादक आवाज मे चीख रही थी , "हाय ! काया चीज बनाईं है भगवान ने , चुसो चुसो , और जोर से चुसो मेरी चूत को . और अन्दर तक अपनी जीभ घुसेड दो . हाय ! मेरी चूत के दाने को भी चाटो . बहुत मज़ा आ रहा है ." दोनों मदहोश हो कर एक दूसरे की प्यास मिटाने मे लगी हुयी थी . लेकिन प्यास जो थी वह बुझने की जगह और बढ़ गई . इसी समय मनोज , उनका चहेता चोदु जीजा जी , घर मे हॉस्पिटल से आया और घर मे किसी को ना पाकर चौंक गया . तभी एक बेडरूम से सिस्कारियों की आवाजे सुने दी . अन्दर गया तो रूम का सीन देख कर उसकी आँखों मे चमक आ गई . दोनों सालिया अपनी चूत की खाज मिटाने के लिए एक दूसरे के साथ गुथ्थाम -गुथ हो कर अपनी -अपनी चूत चट्वा रही थी . यह देख कर उसका लंड एक दम से खड़ा हो गया . दोनों , रीना और कंचन बेखबर हो कर एक दूसरे की चूत चाटने मे लगी हुयी थी . मनोज ने अपने कपड़े उतर कर अपने लंड को तोला . मनो लंड को समझा रहा था की आज रात को एक नही बल्कि दो -दो चूतो को पानी पिलाना है और उनका पानी निकालना है..आगे बढ़कर उसने अपने लंड को कंचन की चूत के पास लेजा कर खड़ा हो गया . रीना थोड़ा चौंकी . मन ही मन सोचा की यह लंड कहाँ से आ गया ..ये भी संजय के लंड जैसा ही मूसल है..लेकिन थोड़ा गोरा है और सुपाडा और मोटा है.. चेहरा ऊपर उठाया तो अपने जीजा जी को खड़े पाया . उसकी तो मन की मुराद पुरी हो गई . उसने लपक कर लंड को अपने हाथो मे समेत लिया . मनो कोई दूसरा आ कर नही ले जाए या कोई दूसरा कब्जा नही कर ले .लंड को हाथो से सहलाती हुयी अपनी जीभ कंचन की चूत से हटा कर अब लंड को चाटने लगी ."क्या हुआ ...चाटो न मेरी चूत को ." कोई जवाब न पाकर कंचन ने अपना चेहरा ऊपर उठा कर देखा की रीना तो जीजा जी के लंड को चाट रही है . नाराज़ होने की जगह उसके अन्दर भी अब चूत की खाज मिटने का औजार मिलाने की खुशी ही महसूस हो रही थी . कंचन के चेहरा को देख मनोज ने अपनी आँख मार कर उसके चुताद पर अपना हाथ रख दिया और लगा सहलाने .रीना ने मनोज के लंड को पुरा मुह मे लेकर चूसने की पुरी कोशिश कर रही थी और उसे बुरी तरह चुम्हला रही थी और चूस चूस कर बेहाल कर दिया . मनोज अपने लंड को आगे -पीछे कर चुसवा रहा था मनो की यह रीना का मुह नही बल्कि उसकी चूत है . मनोज के आनंद की कोई मीना नही रही . अपने हाथो से कंचन का चुताद कस कर पकडा और लंड चुसाई से वोह बेकाबू हो कर बड़्बड़ा रहा था , ""वाह , मज़ा आ रहा है . कितना अच्छा चूस लेती है तू .आह..रीना ..तुझे चोदने के लिए तो मै एक साल से इंतज़ार कर रहा हु..असल मे कल मै तेरी चुदाई करना चाहता था..जीजू आज दिन मे तो आ सकते थे..मै भी तो मौका ढूंढ़ रही थी.. अभी तो आ गया हूँ तू चूस मज़ा आ रहा है .. किसीने ऐसे चूसा नही मेरे लंड को पहले . मेरे लंड को जन्नत मिल गई , आज ...ले ...उफ़ ...चूस मेरा और ... चूस और . ले .. ले ....मेरे लंड को पुरा मुह मे ले कर चूस ."लेकिन जवाब दिया कंचन ने दूसरे छोर से . वह मनोज के लंड की चूसी बड़े गौर से देख रही थी . उसने कहा , "मैंने भी पहले ऐसा बेकाबू लंड नही देखा . पहली बार ऐसी चूसी देख रही हूँ पर मज़ा आ रहा है इस बड़े लंड को चूसते देखकर मुझे . कितना मोटा और बड़ा है ,.मेरे तो कल चूत का कचूमर निकाल दिया..अभी मुह मे पानी आ गया .."तभी मनोज ने अपना लंड रीना के मुह से निकाल कर कंचन के मुह मे पेल दिया और कहा , "ले मेरी कंचन रानी , तू क्यों बाकी रहती है . चूस के मुझे पागल कर दे . हाय , वह जीभ से कर , मुह मे ले और अन्दर ले . पुरा खा इस बड़े लंड को ."कंचन को अब लंड चूसने मे बड़ा मज़ा आ रहा था . अपने हाथ से लंड को हिला -हिला कर चूस रही थी . कभी अपनी जीभ बहार निकाल कर लंड के सुपाडे और लंड की गोटियों को चाट रही थी तो कभी लंड को मुह मे लेकर गपा -गप चूस रही थी . रीना मनोज के सामने आकर खड़ी हो गई . मनोज ने उसके कबूतरों को दबोच लिया .

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09-07-2014, 02:10 AM
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अपने हाथो से उन दोनों फड़ फडाते कबूतरों को मसलने लगा . मसलने के साथ ही रीना के मुह से सिस्कारी निकाल गई आह्ह..जीजू.. क्या ..कर..रहे हो.. उनमे वैसे ही दर्द था..दोपहर मे संजय ने उन्हें जबर्दस्त मसला था... मनोज ने अपना मुह बढ़ाकर उसके मम्मो को जीभ से चाटने लगा . वासना की आग मे जलते हुए उसके मम्मे भारी हो चुके थे . उसके निपल्स कड़क होकर एकदम से तन गए थे . निपल्स पर मनोज जब अपना दंत गदाता तो रीना की सिस्कारी और बढ़ जाती ..दर्द के बावजूद उसे मजा आ रहा था..अब कंचन लंड को मुह से निकाल कर बेद पर चित हो कर लेट गई और मनोज के लंड को अपनी चूत पर रगड़ने लगी और कहने लगी... "जीजा जी , आओ . घुसाओ अपने लंड को अपनी प्यारी साली की चूत मे..आह्ह.. बड़ी बेचैनी हो रही है मेरी चूत मे .""ले मेरी रानी . संभल अपनी चूत को ." इतना बोलकर अपने लंड का एक धक्का मनोज ने दिया तो सर्र.र.र.र..र. से कंचन की चूत मे लंड का सुपाडा घुस गया वो चिल्ला उठी.ऊईई..माँ..लेकिन साथ ही नीचे से कमर उछाला और अब गप्प प.प. से पूरा लंड अन्दर...और उसकी खुशी की चीख..आह्ह जीं .ज्जू. . कंचन खुसी से पागल हो गई . मनोज ने लगातार अपने धक्के देने चालू रखे . चूत भी धक्के खाकर लगातार पनि छोड़ रही थी . तभी रीना उठाकर कंचन के मुह पर बैठ गई . पोजीशन यह थी की कंचन का मुह रीना की चूत पर और रीना के मम्मे मनोज के मुह मे और मनोज का लंड कंचन की चूत मे . बड़ा ही कामुक सीन था यह . तीनो बड़े मजे से चूसी और चुदाई मे लगे हुए थे . तभी रीना ने अपने हाथ बढ़ाकर मनोज का लंड अपने हाथ मे जकड लिया . मनोज जब भी धक्का मर रहा था तो कंचन की चूत का दाना भी रीना के हाथ से रगड़ खा रहा था . इसके कारण कंचन का चुदाई का मज़ा डबल हो गया .कंचन मनोज को उसका रही थी , "छोड़ो मेरे राजा , ख़ूब जोर -जोर से धक्के लगाओ ..अब कोई डर नही है... मेरी चूत की खाज मिटाओ ... उफ्फ्फ .... मेरे चोदु राजा ..... चोदो मुझे .... जोर से चोदो .... तुम्हारे लंड से मुझे रात भर चोदो ..... आह्ह ह . ... ख़ूब चुदाई करो मेरी ..... ओह्ह ह ह .... मेरे लंड .... मेरी चूत के दीवाने ..... मेरे रस को पीने वाले ..... मेरे जीजा जी ..... चोदो मुझे ..... धक्के ..... अहह ह ह ... उछल -उछल कर .... मारो धक्के मुझे .... चोदो उफ़..मर..गयी..उई..ई.ई.ई.ई.आह...... खाज मिटाओ मेरी चूत की तुमने कल से मुझे चुदवाने की आदत लगा दी है जिज्जू.अब मै यही रहूंगी और तुमसे चुदवाउंगी ..... मारो धक्के मारो ..."मनोज भी उसी हिसाब से जवाब दे रहा था , "ले मेरी रानी ....खा मेरे .... लंड को .तेरी जीजी की मैंने सील तोडी और तेरी भी..रीना पिचले साल यहाँ से बच कर गई..लेकिन उसने शायद सील तुड़वा ली है..लेकिन तुझे मै चोदुंगा रानी तेरी जीजी के साथ तीनो को चोदुँगा .. ले ... और ले ... मेरे लंड ..... तुम्हारी चूत आज कितनी ज्यादा जुसी हो गई है .... ले मेरी ... चुद्क्कड़ साली .... ले और ले .... खा मेरे लंड के धक्के .... हाई .... चुदा अपनी चूत को ... ले खा ... और खा ... मेरे लंड के धक्के ."रीना उस चुदाई को बड़ी बेसब्री से देख रही थी . उसकी चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी . वोह भी कंचन से चुसवाते चुसवाते बोलने लगी , "चूस मेरी चूत को .... साली .. चुद्वा चुद्वा कर अपनी चूत की ...खाज तो मिटाली .मै कल से इस लंड के लिए बेचैन हु.अभी जल्दी खत्म कर मुझे भी चुद्वाना है..जीजा जी ..तुम्हारी रीना की चूत मे तुम्हारा लंड बिल्कुल टाईट जायेगा .कंचन साली तू मजा लेगी .. लेकिन मेरी ... चूत ... को चूसेगी कौन ... चूस मेरी चूत को ... लो जीजा जी ... साली का और जोर से धक्के मारो ... फाड़ दो इसकी चूत .... को ... पेलो .. पेलो ... और जोर से पेलो ..अपने मोटे को .... उफ्फ्फ्फ़ ... मेरे बूब्स ... देखो .... दांत न गडाओ ...आह..काटो मत प्लीज़..... हाँ ... ऐसे ... जीभ से चाटो मेरे चुन्चियो को .... मेरे ... निपल्स को .... चाटो ..."पानी ...चोद साले ... चोद साले .... चोद मुझे .... चोदते जाओ ... चोदो ... चोदो मुझे ... यह लो मैं झड़ गई .... येस .... येस ... झड़ गई मै ."मनोज ने आखरी धक्का लगाया और अपने मूसल लंड को कंचन की चूत से निकाल कर रीना को घोड़ी बनाकर उस पर सवार हो गया . एक झटके मे ही उसकी चूत मे अपना लंड पेल दिया रीना की चूत अभी तक फूली हुयी थी..संजय की चुदाई से अभी भी दर्द था..और फ़िर मनोज का झटका..उसकी चेख निकाल गई..ऊह्ह..माँ..मर गई.ई.ई.ई.ई. मेरी चूत गई.ई.ई. काम से...मनोज का लंड अब और सख्त हो चुका था कंचन की चुदाई करते हुए.. कंचन को चोदते चोदते उसका लंड थका नही था बल्कि उसकी चोदने की भूख बढ़ गई थी . कंचन साइड मे लेट कर अपनी उखड़ती साँसों को बराबर करने मे और रीना और मनोज की चुदाई देखने मे लग गई ."आः ... हान् ... और जोर्सय चोदो .... इसी तरह से ... चोड़य ... रहो ... हाय ई दैय्या ....... बहुत गज़ब के चोदते हो ... जीजा जी ....मै पिचले साल तुमसे सील तुड़वा लेती तो मज़ा आता..मेरे चाचा के लड़के ने सील तोडी..तुमने मुझे इतना चुदासी बना दिया था..मेरे सामने ही जीजी को चोदते थे..क्यों नही मुझे भी चोदा तभी..? आह्ह.. चोदो और जोरसे .... हाय रे दैया !" रीना के मुह से सिस्कारी निकलने के साथ बेडरूम मे केवल चुदाई चुदाई हो रही थी . मनोज भी अपने लंड से रीना की चूत की चुदाई फुल स्पीड से चालू रखी .रीना का मज़ा बढ़ता ही जा रहा था , "इसको देखो ... कितना ज़ालिम लौडा है तुम्हारा जीजा जी ! हाय ई ई ... कैसा अकड़ कर खड़ा है .... बड़ा मजा आ रहा है मुझे तुमसे चुदवाने में डीअर ... .... ओ ऊह ह हह ह तुम बहुत अच्छा चोदते हो ..... आ अहह ..... ऊ उह्ह ..... ऊफ्फ्फ .... यूंही ... हाँ यूंही चोदो मुझे ... बस चोदते जाओ मुझे ... अ अब कुछ और नहीं चाहिए मुझे .... आज जी भर के चोदो मुझे ... ... हाँ राजा जम कर चोदाई करो मेरी ... तुम बहुत अच्छे हो ... बस यूंही चोदाई करो मेरी ... ओ ओ ओ ओह्ह ह ह ह ह ह ..... खूब चोदो मुझे ..."मनोज भी उसका जवाब देते हुए बोला , "ले साली , खा मेरे लंड को ... देख कैसे साली ... चुदवा रही है तेरी जीजी को चोदते हुए भी मै तुझे याद करता था..लेकिन तू ने कभी कहा नही की जीजा जी मेरी चूत मारो..... ले संभाल अपनी चूत को ... उफ्फ्फ .. संभाल ... कितनी नरम और कोमल है तुम दोनों की चूतें ... साल्ली ... चुदा ... और ... चुदा ... ऐसा लंड और चूत का संगम तुझे और कहीँ नही मिलेगा ... ले चुदवा ... साली ... तुम दोनों को आज रात भर चोदुँगा ... ले खा मेरे लंड को .... ख़ूब चुद्वाओ ....उफ्फ्फ ""चोद डालो मुझे ! मेरे लंड राजा ....मुझे लूट लो ..... ये बदन तुम्हारा है . अहह ! चढ़ जाओ मुझ पर मेरे जिस्म के मालिक , मेरी चूत छिन्न भिन्न कर दो . मेरी चूत चिर डालो . मेरे चूत के सरताज ... अपने मूसल , मोटे , लंबे और .... गधे जैसे लंड से ! मेरी चूत .... के अन्दर तक पेलो !.... मै और मेरी चूत केवल और केवल तुम्हारी है . आओ , मेरे राजा ..... प्लीज़ मेरी चूत को जोर जोर से .... रगड़ रगड़ कर .... पुरी तरह से पेलो अपने मूसल से !" साथ ही उसका भी पानी निकलना शुरू हो गया . लेकिन मनोज का लंड अभी भी झडा नही था .रात भर दोनों को थोड़ी थोड़ी देर से चोद्ता रहा . जब भी उसका लंड झड़ने के क़रीब होता तो चुदाई रोक देता . उसे आज रात भर दोनों को चोदना जो था . सुबह जैसे ही हुयी मनोज ने दोनों सालियों को पलंग के नीचे बैठाकर अपने लंड को हाथ से उनके ऊपर आगे पीछे करने लगा ."ओह्ह्ह .... उ उ उह्ह ह्ह्ह .... अब मेरा लंड झादेगा .... लो संभालो मेरी धार को ... मेरा अमृत निकाल रहा है ," कहता हुआ अपने लंड को दोनों के मुह पर बारी बारी से ले गया और अपनी वीर्य की धार फौवारे जैसी और तेज़ पिचकारी जैसी छोड़ दी . रात भर का रुका हुवा माल जोर की पिचकारी बन कर छूता . दोनों सालिया हैरानी के साथ इतना ज्यादा मख्खन एक साथ निकलते हुए देख रही थी . मनोज ने झड़ने के बाद अपना लंड बारी -बारी से दोनों के मुह मे ठेल दिया . उसको पिचकारी मरने के बाद इस चुसाई मे बड़ा ही मज़ा आया .थोड़ी देर बिस्तर पर लेटने के बाद दोनों सालिया कंचन और रीना एक पार्टी की फरमाइश कर बैठी . शाम की पार्टी फिक्स हुयी . जगह के बारे मे बोला की मेरे दोस्त भी उस पार्टी मे आएंगे तो जगह दोपहर मे फ़ाइनल करके बता दूँगा लेकिन पार्टी के बाद फ़िर से चुदाई होगी ये भी कह दिया..भले ही वो होटल के रूम मे हो..दोनों तैयार हो गई... फिर नहा कर ऑफिस मे निकाल गया . कंचन और रीना रात भर की चुदाई के बाद थक चुकी थी . दोनों बिस्तर पर एक दूसरे के गले लिपट कर नंगी ही सो गई दो घंटे बाद उठकर दोनों ने एक दुसरे की चूत को गरम पानी से सेंका फ़िर हॉस्पिटल गई..उन्हें रात को फ़िर चुदवाना था..

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